यहां तक कि सबसे अच्छी तरह से की गई मैच फिक्सिंग योजनाएं भी खराब हो सकती हैं अगर… क्या हुआ, यह जानने के लिए नीचे दिए गए अध्याय 53 को पढ़ें!

सुप्रीमो ने दो अवसरों पर बड़ी जीत हासिल की - उन्हें संकेत मिला, योजना बनाई और कई स्तर तैयार किये, और जैकपॉट लगा!

0
701
सुप्रीमो ने दो अवसरों पर बड़ी जीत हासिल की - उन्हें संकेत मिला, योजना बनाई और कई स्तर तैयार किये, और जैकपॉट लगा!
सुप्रीमो ने दो अवसरों पर बड़ी जीत हासिल की - उन्हें संकेत मिला, योजना बनाई और कई स्तर तैयार किये, और जैकपॉट लगा!

यह मेरी पुस्तक, ‘हू पेंटेड माय लस्ट रेड?‘ का अध्याय 53 है। इसे खरीदने के बारे में विवरण पोस्ट के अंत में दिए गए हैं…

श्रृंखला का निर्णायक

दशकों से भारत और वेस्ट इंडीज के बीच क्रिकेट मैचों में भीड़ बढ़ी है। तीव्र प्रतिद्वंद्विता है, लेकिन सम्मान और आपसी प्रशंसा भी है। वेस्टइंडीज के खिलाड़ियों को उनके खेल-कूद के लिए भारतीय दर्शकों द्वारा पसंद किया जाता है। इसका विपरीत भी सच है। वेस्टइंडीज की टीम ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी चमक को बहुत अधिक खोया है और सत्तर और अस्सी के दशक में जो टीम थी उसकी तुलना में आज की टीम कहीं भी नहीं।

पिछले कुछ वर्षों में, हालांकि वेस्ट इंडीज टीम ने एक तरह से वापसी की और इसे पहले की तुलना में कहीं बेहतर टीम के रूप में देखा जाने लगा। इस पृष्ठभूमि को देखते हुए, विभिन्न कैरिबियाई द्वीपों में भारत-वेस्टइंडीज एकदिवसीय श्रृंखला चल रही थी, जो केवल इन दो देशों में ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के क्रिकेट खेलने वाले देशों में क्रिकेट प्रेमियों के लिए एक बड़ा आकर्षण था।

कुछ क्षण बाद, जब यह पता चला कि भारत ने बरसा होने की संभावना वाली परिस्थितियों में बल्लेबाजी करने का फैसला किया है, तो अंतर नीचे गिरने लगे।

वेस्ट इंडीज ने भारत को बड़े अंतर से हराकर पहले दो मैचों में अपनी ताकत साबित की थी। लेकिन भारतीय टीम ने अगले दो मैचों में से एक मैच में तो 8 रन के मामूली अंतर के साथ, एक बार फिर से वापसी की। सभी की नजर अब किंग्स्टन, जमैका के पांचवें और निर्णायक मैच पर थी। स्टेडियम अपनी क्षमता तक भरा हुआ था और संगीत और नृत्य से प्रेम करने वाले वेस्टइंडीज के लोगों की प्रतिध्वनि हर तरफ गूंज रही थी और इसी बीच स्पॉट फिक्सिंग गिरोह सक्रिय था।

इसने वेस्टइंडीज के मैच और श्रृंखला जीतने की व्यवस्था की थी। डॉन दिलावर इस बार असफलता झेल न सका।

उसने मामा-जी के एक चमचे को समझाते हुए कहा – “कम से कम तीन समाचार पत्र कॉलमों में भारतीय जीत की भविष्यवाणी देखने को मिलेगी। टीवी विशेषज्ञ भी दृढ़ता से भारतीय जीत की बात कहेंगे। सट्टा जमकर लगेगा। इसलिए, अगर भारत खराब मौसम के कारण हार जाता है, तो मैच परिणाम पर बहुत अधिक सवाल नहीं उठेंगे और हम बहुत पैसा बना लेंगे।”

जब सिक्का हवा में और टॉस रिपोर्ट आने को होती है, उसी समय ओड्स (टीमों के बीच का अंतर) आ जाता है। इसलिए, जब भारत ने टॉस जीता, तो ठीक उसी समय भारत की हार पर गिरोह ने बहुत सारा पैसा दांव पर लगा दिया। कुछ क्षण बाद, जब यह पता चला कि भारत ने बरसा होने की संभावना वाली परिस्थितियों में बल्लेबाजी करने का फैसला किया है, तो अंतर नीचे गिरने लगे।

एक वरिष्ठ टिप्पणीकार ने कहा – “विराज वर्मा द्वारा यह एक आश्चर्यजनक निर्णय है।”

इसके बाद कैमरे ने भारतीय ड्रेसिंग रूम में प्रवेश किया, जहां कोच को अपने कप्तान से अजीब इशारे करते देखा जा सकता था, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

सट्टे माफिया कुंठा में खिसिया रहे थे। गिरोह ने वेस्टइंडीज की जीत पर $250 मिलियन की राशि लगाई थी – मैच की शुरुआत में $100 मिलियन और भारतीय बल्लेबाजी के पतन के बाद $150 मिलियन।

कमेंट्री बॉक्स में विशेषज्ञों ने गुप्त रूप से इस भारी भूल और टीम को इससे होने वाले खामियाजे का विश्लेषण करना शुरू कर दिया। उनकी सबसे बुरी आशंका सच होती दिख रही थी – बस कुछ ही ओवरों में, भारत 38 रनों के बहुत ही छोटे से स्कोर पर पांच विकेट गंवा दिए थे। विजय सूर्या को छोड़कर बाकी शीर्ष बल्लेबाज पवेलियन लौट गए थे। सूर्या का साथ दे रहे थे साहसी विकेटकीपर शक्ति कांत।

इस खबर को अंग्रेजी में यहाँ पढ़े।

सूर्या अपने काम को बेफिक्री से कर रहे थे, गेंद को स्वतंत्र रूप से मारना और अच्छी गेंद पर आराम से खेल रहे थे। उन्होंने आगे आने वाले खिलाडियों के लिए रास्ता बनाया और आखिर तक डटे रहे, उन्होंने अपनी टीम के 178 के कुल स्कोर में 126 रन बनाए। जब वो वापस लौटे तो उनका स्वागत एक हीरो की तरह हुआ, इस कीर्तिमान के लिए वेस्टइंडीज की भीड़ ने जोर-शोर से उनका अभिवादन किया, भारतीय टीम के लिए समस्याएं अभी भी थीं। बचाव करने के लिए स्कोर बहुत छोटा लग रहा था।

बादलों के घना होने और डकवर्थ-लुईस प्रणाली के प्रभावी होने की संभावना के साथ, वेस्टइंडीज ने पहली गेंद से अच्छी स्ट्राइक रेट के साथ आक्रमण करने का फैसला किया। तेज बारिस के बाद लगभग बीस मिनट तक खेल को रोकना पड़ा। जब तक खेल फिर से शुरू हुआ, तब तक वेस्टइंडीज के बल्लेबाज अपनी लय खोते हुए नजर आये। नियमित अंतराल पर विकेट गिरना शुरू हो गए और लंबे समय तक बारिश होने से डी-एल पद्धति के अनुसार विंडीज कमजोर पड़ गयी। भारत को तीन रन से विजेता घोषित कर दिया गया।

सट्टे माफिया कुंठा में खिसिया रहे थे। गिरोह ने वेस्टइंडीज की जीत पर $250 मिलियन की राशि लगाई थी – मैच की शुरुआत में $100 मिलियन और भारतीय बल्लेबाजी के पतन के बाद $150 मिलियन। मामा-जी फिर से हार गए थे और डॉन एक बार फिर हार गया। यह बहुत महंगा पड़ा।

यदि कोई एक व्यक्ति जिसने बहुत ज्यादा पैसा बनाया था, तो यह सुप्रीमो था। उसका लगातार दूसरी बार जैकपॉट लगा था। उसने हिसाब लगाकर जुआ खेला था। यह पता लगने के बाद कि गिरोह ने वेस्ट इंडीज की जीत पर बहुत बड़ा दांव लगाया था, उसने विपरीत स्थिति ले ली थी। उसे यह मालूम था कि ऐसे लोग हैं जो माफिया की योजनाओं को विफल करने के लिए दृढ़ थे। किसने उसे खबर दी? उसके अंदरूनी सूत्र कौन थे?

सुप्रीमो सबसे महत्वपूर्ण चीजें खुद करने में विश्वास करते थे, खासकर जब बात टेक्नोलॉजी की हो। वह जान चुका था कि मामा-जी गुप्त तरीके से किसी काम में लगे हैं। लेकिन कोई तरीका नहीं था कि वह उनके फोन को टैप कर सके, भले ही वह तकनीक और इसके इस्तेमाल के तरीकों का जानकार था। ये कानूनी मामले थे; बिना कानूनी सहमति के फोन टैप करना अपराध था। अगर उसने ऐसा किया और मामला उजागर हो जाता, तो उसका करियर खत्म हो जाता। लेकिन प्रौद्योगिकी का उपयोग करने के लिए एक सीमा तक तरीके थे। सुप्रीमो ने बेनामी व्यक्ति, जिसके माध्यम से मामा-जी ने दांव लगाया था, पर नजर रखी। मामा-जी ने हमेशा एक सुरक्षित तरीके का उपयोग किया, लेकिन मामा-जी के दांव लगाने के बाद उनका बेनामी, अपने निजी मोबाइल फोन का उपयोग करके मामा-जी के संकेतों पर अपने स्वयं के कुछ दांव लगाने लगा। यही वो ओपन फोन लाइन थी जिसे सुप्रीमो ने निशाना बनाया था और जानकारी निकाली थी।

लेकिन फिर भी यह नहीं बताया कि वह उन दो अवसरों पर कैसे जीता – उसने गिरोह के विपरीत स्थिति बनाई थी! ऐसा प्रत्येक टीम के प्रमुख खिलाड़ियों और उनकी ताकत और कमजोरियों के बारे में उनके ज्ञान के कारण था। वह जानता था कि एक खिलाड़ी साफ-सुथरा है और उस खिलाड़ी द्वारा शानदार प्रयास करने के बाद, सुप्रीमो ने दोनों मामलों में अपनी स्थिति बदल ली। इसका मतलब था कि खेल अपने “तार्किक निष्कर्ष” पर पहुंच गया। यानी बहुत सारा पैसा!

वह हैरान था कि दीपिका ने सेवकों को ‘अच्छे’ और ‘बुरे’ के रूप में वर्गीकृत किया था और दोनों को दूसरे से सुरक्षित दूरी पर रखा था। उन्होंने प्रतिद्वंद्विता में भी प्रसन्न होकर खेल खेले। यह ऐसा था जैसे उनके लिए दो ब्रह्माण्ड थे और केवल वही दोनों के बीच निर्बाध रूप से आ जा सकती थी।

अधिकांश सट्टेबाजी ऑनलाइन, यूके, मोनाको, मकाओ और अमेरिका में नेवादा राज्य सहित अन्य कर आश्रयों से की गई थी, क्योंकि यह राशि अपेक्षाकृत छोटी थी, इसलिए उन्होंने अधिकारियों का ध्यान आकर्षित नहीं किया।

अपनी चोरी-छिपे सूचनाएं जुटाकर कमाई गयी दौलत के लिए उसे बिल्कुल भी पछतावा नहीं था, इस तथ्य के बावजूद कि मामा-जी और उन्होंने एक-दूसरे के साथ तालमेल स्थापित कर लिया था। मामा-जी हमेशा दिमागदारों की आदर करते थे और सुप्रीमो ने उन्हें प्राचीन शास्त्रों, समकालीन इतिहास और प्रौद्योगिकी के अपने ज्ञान से प्रभावित किया था। मामा-जी को पता था कि राव पर आश्रित रहना सुप्रीमो के लिए आसान नहीं था और इसलिए उसे तैयार करने के लिए मामा-जी ने कड़ी मेहनत की। आखिरकार, राव ने मामा-जी को पीछे छोड़ते हुए प्रधान मंत्री पद की दौड़ जीती थी।

यह उन कई वार्तालापों में से एक था जो हाल ही में दोनों के बीच हुए थे, जिसने सुप्रीमो को सतर्क कर दिया था। मामा-जी फिसले, शायद अनजाने में, कि वह एक बड़े समूह का हिस्सा था जिसने दीपिका के परिवार और दोस्तों के वित्तपोषण में योगदान दिया। या हो सकता है कि उसने दूसरे व्यक्ति को प्रभावित करने के लिए ऐसा जानबूझकर कहा था। जो भी मामला हो, सुप्रीमो ने संकेत ले लिया और अपने लाभ के लिए इसका इस्तेमाल किया।

इस बीच, नाराज दिलावर हरकत में आ गए। उन्होंने भारतीय जीत के वास्तविक लाभार्थी के फोरेंसिक ऑडिट (न्यायिक लेखापरीक्षण) का आदेश दिया। लेकिन बुकीज (सट्टे लगवाने वाले) ने, जिन्होंने डॉन के लिए काम किया, ने जोर देकर कहा कि उन्होंने गिरोह के बाहर किसी का कोई दांव नहीं लगवाया। अधिकांश सट्टेबाजी ऑनलाइन, यूके, मोनाको, मकाओ और अमेरिका में नेवादा राज्य सहित अन्य कर आश्रयों से की गई थी, क्योंकि यह राशि अपेक्षाकृत छोटी थी, इसलिए उन्होंने अधिकारियों का ध्यान आकर्षित नहीं किया। दिलावर ने खुद से कहा – “जिसने भी क्रॉस-बेटिंग की थी, उसने योजना बनाई थी और अच्छी तरह से कई स्तर तैयार किये थे[1]।”

संदर्भ:

[1] Who painted my lust red: When Bollywood meets Cricket meets Politicians (Money Trilogy Book 2) – Amazon.in

Available in Hardbound, Paperback and Kindle version

हार्ड-बाउंड

 


W3Schools
पेपर-बैक

 


W3Schools
किन्डल

 


W3Schools

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.