डॉ स्वामी : भारत के मुकुट में एक रत्न

चूँकि ये निहित स्वार्थ उनके खिलाफ कुछ नहीं पा सके, इसलिए उन्होंने अब उन्हें शर्मिंदा करने के लिए डॉ स्वामी का एक पुराना भूला बिसरा इंटरव्यू निकाला है, लेकिन आरएसएस और भगवा परिवार मजबूती से उनके पीछे खड़ा है।

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डॉ स्वामी : भारत के मुकुट में एक रत्न

निहित स्वार्थों ने एक इंटरव्यू के वीडियो क्लिप को पुनः प्रकट किया है जो डॉ सुब्रमण्यम स्वामी ने दूरदर्शन को काफी सालों पहले दिया था जब वह भाजपा में नहीं थे। उनकी टिप्पणियों को चुनिंदा तरीके से उपयोग किया गया है और भाजपा, अनुच्छेद 370 इत्यादी पर उनके विचारों को अप्रसंगिक रूप से लिया गया है जिससे ऐसा दिखाया जाए कि वे भाजपा से नफरत करते हैं।

वास्तव में, यदि कोई डॉ स्वामी से छोटे से स्तर पर भी जुड़े हुए हैं तो वे हिन्दुत्व, जो संघ परिवार के विचारधारा का आधार है, के प्रति उनके तीव्र प्रतिबद्धता का प्रमाण देंगे।

उन पर कीचड़ उछालने का हरसंभव प्रयास किया गया … लेकिन ऐसे सभी दुर्भावनापूर्ण प्रयास विफल हो गए।

यह उनकी गहरी देशभक्ति थी, जिसने उन्हें हार्वर्ड में एक बेहद होनहार अकादमिक करियर को त्यागने, भारत लौटने, धोती और कुर्ता धारण करने और सार्वजनिक जीवन में जुटने के लिए प्रेरित किया। यह आरएसएस था जिसने इस युवा कार्यकर्ता की अपार प्रतिभा को देखा और आर्थिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए उन्हें भूतपूर्व भारतीय जनसंघ में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया। उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत में, यह बहुत स्पष्ट हो गया था कि डॉ स्वामी के पास खुद का दिमाग था … वे वह नहीं थे जिसे धन और सत्ता के प्रस्तावों का लालच देकर भटकाया जा सकता था। उन्होंने अटलजी जैसे नेता के साथ लोहा लेने की हिम्मत की, जिन्होंने यह सुनिश्चित किया कि डॉ स्वामी अपना कार्य न कर सकें। यह मोरारजी देसाई थे जिन्होंने डॉ स्वामी में क्षमता देखी और उन्हें प्रोत्साहित किया। डॉ स्वामी ने चंद्रशेखर, राजीव गांधी और पी.वी नरसिम्हा राव जैसे अन्य नेताओं के साथ एक उत्कृष्ट घनिष्ठता का आनंद लिया जिन्होंने उनकी बौद्धिक प्रतिभा और ईमानदारी को स्वीकार किया।

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चाहे कोई भी पार्टी सत्ता में हो डॉ स्वामी ने बड़े-बड़े भ्रष्टाचारों के खिलाफ लड़ाई लड़ी … चाहे वह 2 जी घोटाला हो, जयललिता का भ्रष्टाचार, जेट-एतिहाद सौदा, नेशनल हेराल्ड मामला इत्यादि। उन्होंने कानूनी कुशाग्रता और प्रबलता के साथ लड़ाई लड़ी। वे इस प्रक्रिया में शक्तिशाली शक्तियों के साथ निपटे। उन पर कीचड़ उछालने का हरसंभव प्रयास किया गया … लेकिन ऐसे सभी दुर्भावनापूर्ण प्रयास विफल हो गए।

चूंकि ये निहित स्वार्थ उनके खिलाफ कुछ भी नहीं पा सकते थे, इसलिए उन्होंने अब उनके 80 वें जन्मदिन की पूर्व संध्या पर उन्हें शर्मिंदा करने के लिए दूरदर्शन के धूल भरे अभिलेखों से एक पुराना भूला बिसरा इंटरव्यू निकाला है। लेकिन आरएसएस और भगवा परिवार उनके पीछे मजबूती से खड़ा है..जो कि इन व्यापारिक अपराधियों, आईएसआई एजेंटों और उनके बेहूदा चमचों की रातों की नींद हराम कर रहा है।

ध्यान दें:
1. यहां व्यक्त विचार लेखक के हैं और पी गुरुस के विचारों का जरूरी प्रतिनिधित्व या प्रतिबिंबित नहीं करते हैं।

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