सीबीआई के रडार पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल। सीबीआई ने दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड में 207 करोड़ रुपये के घोटाले का खुलासा किया!

सीबीआई के रडार पर केजरीवाल, सीबीआई द्वारा हाल ही में किए गए संयुक्त औचक निरीक्षण के दौरान सामने आया डीयूएसआईबी में 207 करोड़ रुपये का घोटाला!

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सीबीआई के रडार पर केजरीवाल, सीबीआई द्वारा हाल ही में किए गए संयुक्त औचक निरीक्षण के दौरान सामने आया डीयूएसआईबी में 207 करोड़ रुपये का घोटाला!
सीबीआई के रडार पर केजरीवाल, सीबीआई द्वारा हाल ही में किए गए संयुक्त औचक निरीक्षण के दौरान सामने आया डीयूएसआईबी में 207 करोड़ रुपये का घोटाला!

सीबीआई ने केजरीवाल की अध्यक्षता वाले डीयूएसआईबी में 207 करोड़ रुपये के घोटाले का खुलासा किया है!

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता वाला दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डीयूएसआईबी) के बैंक ऑफ बड़ौदा के नकली खातों में 207 करोड़ रुपये की हेराफेरी के लिए सीबीआई के रडार पर हैं। सीबीआई ने मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाले डीयूएसआईबी में 207 करोड़ रुपये के घोटाले का खुलासा किया है, जिसमें डीयूएसआईबी के धन को बैंक ऑफ बड़ौदा (बीओबी) के “नकली” खाते में स्थानांतरित किया गया था। एजेंसी ने शनिवार को बैंक ऑफ बड़ौदा की पटपड़गंज शाखा प्रबंधक के कार्यालय और आवास पर तलाशी ली। दिलचस्प रूप से उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया पटपड़गंज विधानसभा क्षेत्र से चुने गए हैं।

यह घोटाला सीबीआई द्वारा हाल ही में किए गए संयुक्त औचक निरीक्षण के दौरान सामने आया है, जिसमें डीयूएसआईबी और बीओबी के अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, सीबीआई जांचकर्ताओं ने कहा। डीयूएसआईबी मुख्य कार्यालय के अकाउंट सेक्शन में की गयी जाँच से पता चला है कि 1 सितंबर, 2020 से 31 मार्च, 2021 के बीच बैंक ऑफ बड़ौदा की पटपड़गंज शाखा में 214 करोड़ रुपये की रकम के 112 फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) खाते खोले गए। उन्होंने कहा कि इन फिक्स्ड डिपॉजिट खातों को बनाने के लिए बीओबी में डीयूएसआईबी के सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया स्थित पांच खातों से राशि ली गई थी।

एफडीआर बनाने के उद्देश्य से बैंक ऑफ बड़ौदा को भेजे गए धन को डीयूएसआईबी के फर्जी खाते के माध्यम से डायवर्ट किया गया था। डीयूएसआईबी को उपलब्ध कराए गए दस्तावेज सामान्य कागज पर कथित रूप से छापे गए नकली एफडीआर थे।

चौंकाने वाली बात यह है कि कई एफडी रसीदें सिर्फ ए4 कागज पर मुद्रित हैं, किसी सुरक्षा कागज यानी स्टांप बगैरह पर नहीं। दस्तावेजों से पता चला है कि डीयूएसआईबी के नाम पर 6.01 करोड़ रुपये से अधिक की केवल तीन सावधि जमाएँ जारी की गई हैं, जबकि 207 करोड़ रुपये से अधिक के 109 सावधि जमा “नकली प्रतिभूति/ फर्जी कागजों पर” हैं और धन की हेराफेरी की गई है, सीबीआई ने कहा। एजेंसी को यह भी पता चला कि डीयूएसआईबी अपने सभी खाते सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में रखता है और बीओबी में खाता उसके द्वारा या उसके अधिकारियों द्वारा नहीं खोला गया था।

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सीबीआई ने कहा कि अक्टूबर, 2020 में डीयूएसआईबी को एक कंपनी के रूप में दिखाते हुए खाता खोला गया था, हालांकि यह एक दस्तावेज आधारित बोर्ड है परंतु प्रथम दृष्ट्या वास्तविक नहीं लगता है।

“केंद्रीय जांच ब्यूरो ने दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डीयूएसआईबी) के अज्ञात अधिकारियों, बैंक ऑफ बड़ौदा, पहाड़गंज शाखा, नई दिल्ली के अज्ञात अधिकारियों और अन्य अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ आरोपों पर मामला दर्ज किया है कि, दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डीयूएसआईबी), दिल्ली की एनसीटी सरकार के तहत, विभिन्न बैंकों में एफडीआर के रूप में अपने अधिशेष धन का निवेश किया है और उसी को संदिग्ध नकली खाते/ एफडीआर में बदल दिया है।

मुख्यमंत्री केजरीवाल की अध्यक्षता वाले डीयूएसआईबी में धन की हेराफेरी का विवरण देते हुए सीबीआई ने कहा – “यह आरोप लगाया गया कि वर्ष 2020-2021 के दौरान, डीयूएसआईबी ने निवेश के उद्देश्य से नई दिल्ली विकास कुटीर सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया शाखा में स्थित 5 अलग-अलग खातों से नई दिल्ली पहाड़गंज बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा में एफडीआर बनाने के उद्देश्य से धन हस्तांतरित किया। लेकिन बैंक ऑफ बड़ौदा, पहाड़गंज शाखा, नई दिल्ली के अज्ञात अधिकारियों के साथ साजिश में डीयूएसआईबी के अज्ञात अधिकारियों ने 207.99 करोड़ रुपये (लगभग) की धनराशि की हेराफेरी कर दी। यह भी आरोप लगाया गया कि वास्तविक एफडीआर जारी करने के बजाय उक्त धनराशि को एक निजी फर्म के नाम से एक खाते में भेज दिया गया। यह भी आरोप लगाया गया कि यह पैसा बैंक ऑफ बड़ौदा, पहाड़गंज शाखा, नई दिल्ली में डीयूएसआईबी के नाम वाले एक फर्जी खाते में स्थानांतरित किया गया। एफडीआर बनाने के उद्देश्य से बैंक ऑफ बड़ौदा को भेजे गए धन को डीयूएसआईबी के फर्जी खाते के माध्यम से डायवर्ट किया गया था। डीयूएसआईबी को उपलब्ध कराए गए दस्तावेज सामान्य कागज पर कथित रूप से छापे गए नकली एफडीआर थे। कुल मिलाकर, 214 करोड़ (लगभग) रुपये के 112 दस्तावेज (एफडीआर) बैंक द्वारा डीयूएसआईबी को दिये गये। आरोप लगाया गया कि इनमें से केवल 3 जिनकी राशि ₹6,01,59,735 है, को ही डीयूएसआईबी के नाम से वास्तविक पाया गया, बाकी के 109 एफडीआर पर जाली होने का संदेह है।”

डीयूएसआईबी, बैंक ऑफ बड़ौदा के कार्यालय और बैंक मैनेजर के आवास पर तलाशी ली गई। सीबीआई ने कहा कि तलाशी के दौरान बैंक प्रबंधक के परिसर से जाली/ नकली एफडीआर से संबंधित दस्तावेज बरामद किए गए हैं।

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