सुनंदा हत्या मामला : सुब्रमण्यम स्वामी की अथक कानूनी लड़ाई ने शशि थरूर को सबक सिखाया

प्रभावशाली लोगों द्वारा सुनंदा हत्या मामले को दूसरे मार्ग पर ले जाने और अस्पष्ट करने के हर सम्भव प्रयास के बावज़ूद, दिल्ली पुलिस आखिरकार इसे हत्या का मामला बता रही है।

0
1130
सुनंदा हत्या मामला : सुब्रमण्यम स्वामी की अथक कानूनी लड़ाई ने शशि थरूर को सबक सिखाया
सुनंदा हत्या मामला : सुब्रमण्यम स्वामी की अथक कानूनी लड़ाई ने शशि थरूर को सबक सिखाया

सुनंदा हत्याकांड मामला इस बात का एक उत्कृष्ट उदाहरण है कि शक्तिशाली लोगों के शामिल होने पर अपराध को शांत करने के लिए चुप्पी कैसे खरीदी जा सकती है। सुनंदा पुष्कर अपने पति और तत्कालीन केंद्रीय मंत्री शशि थरूर के साथ हुए कड़वाहट भरे झगड़े के कुछ दिन बाद 17 जनवरी 2014 को होटल लीला में मृत पाई गई थी। सभी जानते थे कि यह एक हत्या थी, लेकिन 24 फरवरी, 2014 तक आपराधिक चुप्पी बनाए रखी, भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने एक ट्वीट के साथ इसे व्यापक रूप से उजागर किया कि उन्हें जानकारी मिली कि सुनंदा को रूसी जहर का उपयोग करके मारा गया था [1]

उस समय संप्रग (यूपीए) सरकार सत्ता में थी और कई लोग सुब्रमण्यम स्वामी पर “रूसी जहर षड्यंत्र सिद्धांत” देकर बेचारे शशि थरूर को अपमानित करने का आरोप लगा रहे थे। दिल्ली पुलिस एक शुतुरमुर्ग की तरह व्यवहार कर रही थी और उसने प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) भी दर्ज नहीं की थी। इससे भी बुरी बात यह थी कि तत्कालीन ज्वाइंट कमिश्नर विवेक गोगिया ने उसकी (सुनन्दा) मौत के अगले ही दिन पति थरूर को सेल फोन जैसे सभी अहम सबूत वापस लौटा दिए थे। चालाक शशि थरूर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली नई सरकार को मक्खन लगा रहे थे और उन्हें अक्टूबर 2014 में मोदी के स्वच्छ भारत अभियान के प्रचारक के रूप में चुना गया था और उन्हें अरुण जेटली जैसे भाजपा नेताओं और लुटियंस की चीयर गर्ल्स जैसे पत्रकारों के साथ पार्टी करते देखा गया था।

सुब्रमण्यम स्वामी सुनंदा पुष्कर को न्याय दिलाने के लिए अपनी अथक लड़ाई के लिए सभी श्रेय के हकदार हैं।

अक्टूबर 2014 के पहले सप्ताह में, सुब्रमण्यम स्वामी ने फिर से सुनंदा की अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की पोस्टमार्टम रिपोर्ट को उजागर करके थरूर पर एक बड़ा आघात किया। रिपोर्ट, तस्वीरें और वीडियो स्पष्ट रूप से विस्तृत करते हैं कि उसे जहर दिया गया था और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया था। रिपोर्ट में दिल्ली पुलिस के गंभीर दोष और असहयोग को भी उजागर किया गया है। आखिरकार, अपनी जान बचाने के लिए, दिल्ली पुलिस ने जनवरी 2015 में थरूर का नाम का उल्लेख किये बिना हत्या की प्राथमिकी दर्ज की।

फिर भ्रष्ट नेताओं के कृपापात्र क्रिकेट के सट्टेबाजी संगठन में सभी बदमाशों द्वारा थरूर को बचाने की रणनीति आई। जहर को खोजने की कोशिश में चालाक तत्वों द्वारा दो साल बर्बाद कर दिए गए और यहां तक कि जहर का विश्लेषण करने के लिए इसे संघीय जांच ब्यूरो (एफबीआई) अमेरिका की प्रयोगशाला में भेज दिया गया! स्वामी ने दिल्ली पुलिस को याद दिलाया कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले में कहा गया है कि थरूर की तत्काल गिरफ्तारी और आरोप-पत्र दाखिल करने के लिए जहर का नाम खोजने की जरूरत नहीं है। दिल्ली पुलिस के सतर्कता विभाग ने विवेक गोगिया की अगुवाई वाली पहली जांच टीम द्वारा की गई गंभीर अवैधताओं को पाया।

आखिर में स्वामी ने 2017 के मध्य में दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। सबसे पहले, मामला न्यायमूर्ति जी एस सिस्तानी के समक्ष था, जिन्होंने दिल्ली पुलिस को सरासर अवैधता के लिए हर मामले पर फटकार लगाई। छठी सुनवाई के बाद, मामला किसी तरह जस्टिस एस मुरलीधर के सामने आया, जिन्होंने पहले दिन ही सुनवाई के बिना स्वामी की याचिका खारिज कर दी थी। खराब फैसले को लेकर स्वामी और जस्टिस मुरलीधर के बीच वाकयुद्ध (शाब्दिक युद्ध) चल रहा था [2]। यह आश्चर्यजनक था कि, पूरे फैसले में, सुनंदा की मौत का कोई जिक्र नहीं था और जस्टिस मुरलीधर ने मुकदमा दायर करने के लिए स्वामी को दोषी ठहराया ! फैसले में दिल्ली पुलिस को कोई निर्देश नहीं दिए गए थे, जिसका मतलब दिल्ली पुलिस को मामला बंद करने की आजादी से था।

अब दिल्ली पुलिस 31 अगस्त, 2019 को सुनवाई अदालत में थरूर पर हत्या के आरोपों को जोड़ने पर जोर दे रही है, हमें उम्मीद है कि न्यायमूर्ति मुरलीधर इस पर विचार करेंगे कि उन्होंने अपनी ओर से इस तरह के बुरे फैसले का मसौदा कैसे तैयार किया। लुटियन ठग मंडली के लिए ये गंदे खेल आम बात हैं। कम से कम इतिहास हमें यही बताता है।

जनवरी 2018 में, अथक सुब्रमण्यम स्वामी ने दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस अमिताव रॉय ने दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया। शीर्ष अदालत को जवाब देने से पहले खतरे को भांपते हुए दिल्ली पुलिस ने थरूर के खिलाफ घरेलू हिंसा और आत्महत्या के लिए मजबूर करने का आरोप पत्र दायर किया। अब दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट से थरूर के खिलाफ हत्या के आरोपों को भी सुनंदा की हत्या मामले में शामिल करने को कहा है। एक चुनाव से कितना बदलाव आता है!

इस खबर को अंग्रेजी में यहाँ पढ़े।

लुटियन तंत्र को डूब कर मर जाना चाहिए – एक केंद्रीय मंत्री की पत्नी की हत्या हो जाती है और किसी को इससे कोई परेशानी नहीं होती है! अपराध, सेक्स और काले धन को वैध बनाने की एक गाथा जिसे पत्नी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस (पीसी) में बताने का वादा किया था, एक सेवन-स्टार होटल (होटल लीला) में मौत के घाट उतार दिया गया था। सुनंदा को आईपीएल क्रिकेट धोखाधड़ी और शशि थरूर की भूमिका के बारे में एक पीसी बुलाने के इरादे जाहिर करने से कुछ ही घंटों में समाप्त कर दिया गया था। जो चकित करने वाला है वह यह कि एक इतने बड़े होटल में सबसे अधिक बेईमानी से एक हत्या होती है और मीडिया सच्चाई नहीं ढूंढना चाहता है?

कई संपादक, पत्रकार और महिलाएं शशि थरूर के साथ इस तरह से नजदीकियां बढ़ा रहे थे जैसे कि कुछ भी अनुचित नहीं। कई महिला पत्रकारों को थरूर से तथाकथित अनन्य बाइट्स प्राप्त करने में खुशी मिल रही थी, हालांकि वह जघन्य अपराधों के लिए आरोपित किए गए थे। थरूर खुलेआम सभी विषयों पर इन महिला पत्रकारों को बाइट दे रहे थे और किसी ने भी उनके खिलाफ आरोपों के बारे में नहीं पूछा! और भारत में यह पत्रकारिता कहलाता है! यह अच्छा है कि दिल्ली पुलिस ने एक सुनवाई अदालत में घोषणा की है कि वह एक हत्या के आरोप को आगे बढ़ाएगी। सुब्रमण्यम स्वामी सुनंदा पुष्कर को न्याय दिलाने के लिए अपनी अथक लड़ाई के लिए सभी श्रेय के हकदार हैं।

संदर्भ:

[1] Sunanda Tharoor was given ‘Russian Poison’, claims Subramanian SwamyFeb 24, 2014, India Today

[2] War of Words between New Judge and Dr Swamy inside Delhi High Court on Sunanda Murder ProbeOct 22, 2017, PGurus.com

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.