सोता हुआ सेबी: जागो और आईआईएफएल बॉन्ड (ऋणपत्र) की बिक्री बंद करो

जबकि सेबी सो रहा है, संदिग्ध बाॅन्ड प्रस्ताव और चुनाव से ठीक पहले उनकी खरीदी से सवाल उठता है - ये एनसीडी किसे आकर्षक लगते है?

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सोता हुआ सेबी: जागो और आईआईएफएल बॉन्ड (ऋणपत्र) की बिक्री बंद करो
सोता हुआ सेबी: जागो और आईआईएफएल बॉन्ड (ऋणपत्र) की बिक्री बंद करो

लगता है कि भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) अपने मूल उद्देश्य को भूल गया – शेयरधारकों के लिए आवाज उठाना, यह सुनिश्चित करना कि उनके सर्वोत्तम हित की सेवा की जाए। बार बार, सेबी जिस मंदी से कार्य करता है, अगर वास्तव में करे भी तो बहुत धीमा है। इससे अपराधियों को अपनी पनाह छिपाने के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है, खराबी को दूर करने और अदालतों और न्यायाधिकरणों में आश्रय लेने का समय मिलता है। जब तक उच्चतम न्यायालय में फैसला हो, दशकों बीत जाते हैं और सफेदपोश अपराध को भुला दिया जाता है और तब तक कमाया गया पैसा पचा लिया जाता है। इंडियाइंफोलाइन (आईआईएफएल) को असावधान भारतीय जनता के बीच 2000 करोड़ रुपये की असुरक्षित बॉन्ड बिक्री करने के लिए अनुमति देने का हालिया निर्णय चौंकाने वाला है। सेबी ने मुंबई की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू), गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) के विशिष्ट निर्देशों के बावजूद आईआईएफएल को एनएसईएल घोटाले[1]. में अपनी भूमिका के लिए अयोग्य घोषित करने के बजाय दूसरी ओर देख रहा है।

Think about this – Every HNI that I know will squeeze water from rocks before making even a paisa of investment. What is so attractive about this offering that is making HNIs salivate?

बाॅन्ड की बिक्री अभी भी चल रही है?

एसएफआईएल द्वारा 22 जनवरी[2] को 2,000 करोड़ रुपये का असुरक्षित गैर-परिवर्तनीय ऋणपत्र (डिबेंचर) (एनसीडी) शुरू किया गया था। 25 जनवरी[3] को आईआईएफएल शेयरधारक द्वारा इसे रोकने का आग्रह करते हुए मद्रास उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की गई थी। इसके बावजूद, बिक्री की गई। जब इस दलाली के खिलाफ बहुत सारे सवाल उठ रहे हैं, तो सेबी कुछ कदम क्यों नहीं उठा रही है? बॉन्ड की बिक्री 20 फरवरी तक होगी और इससे पहले कि कुछ पता चले हमारी नाक के नीचे एक और वित्तीय घोटाला हो सकता है। कंपनी ने लगभग रुपये 1229 करोड़ (चित्र 1 देखें) कमाए हैं।

क्या एनसीडी ऑफर को बंद कर दिया गया है?

एसएफआईएल समझा सकता है कि क्या उन्होंने अपने प्रस्ताव को बंद कर दिया है या निवेशकों ने दिलचस्पी खो दी है, क्योंकि इस प्रस्ताव में गतिविधि बंद हो गयी है। सेबी को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करनी चाहिए और इस मुद्दे पर अपना रुख बताना चाहिए:

1. नीचे दिए गए आंकड़े पर एक नज़र से पता चलता है कि इस प्रकार अब तक एकत्र किए गए 1229 करोड़ रुपये में से, लगभग 875 करोड़ रुपये उच्च मूल्य वाले व्यक्तियों (एचएनआई) और खुदरा द्वारा किए गए प्रतीत होते हैं। इस बारे में सोचें – हर एचएनआई मेरे अनुसार एक पैसे का भी निवेश करने से पहले असंभव को हथियाने की कोशिश करेगा। इस प्रस्ताव में ऐसा क्या आकर्षक है जो एचएनआई को  बहुत खुश कर रहा है? एक संभावित उत्तर के लिए, आगे पढ़ें ..

Figure 1. IIFL NCD issue
चित्र 1. IIFL NCD issue

तीन कारण बताओ नोटिस

तीन कारण बताओ नोटिस। अब तक सेबी ने नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड (एनएसईएल) संकट से जुड़े दलालों, जिनमें से एक आईआईएफएल है, से निपटने में केवल येही हासिल किया है। लगभग पाँच साल पहले, जब ईओडब्ल्यू ने संकटग्रस्त नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड (एनएईएल) के उधारकर्ताओं से पूछताछ करने और लगभग 4,300 करोड़ रुपये की संपत्ति को संलग्न करने के बाद, एक्सचेंज के दलालों की संपत्ति के इस्तेमाल को रोकने ककी धमकी दी थी, तब पता चल गया था कि कुछ गड़बड़ है।

ईओडब्ल्यू के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अगर जरूरत पड़े तो इस मामले में दलालों की संपत्ति भी जमी की जा सकती है और साथ ही यह भी कहा कि दलालों से पूछताछ करने पर, यदि आवश्यक हो तो भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड को सूचित किया जाएगा, क्योंकि कई दलालों को पूंजीगत नियामक द्वारा विनियमित किया जाता है। यह 16 जनवरी 2014 के बिजनेस स्टैंडर्ड में प्रकाशित हुआ था। अब मामला अधिक दिलचस्प बन जाता है। निम्नलिखित ग्राफिक को देखें:

Figure 2. Text as it appeared in the Business Standard article
चित्र  2. Text as it appeared in the Business Standard article

उस लेख के लिए एक त्वरित ऑनलाइन खोज थोड़ा संशोधित संस्करण दिखाती है, जिसमें एसएफआईएल का नाम हटा दिया गया है [4]! जो आप देख रहे हैं वह एक नाम को पवित्र करने का प्रयास है ताकि वह दिखाई नहीं देगा, अगर कोई निवेशक यथोचित परिश्रम करने का कष्ट करेगा। लेकिन सबूत प्रिंट में है और सेबी भी जनता है। फिर भी वह चुप है।

सेबी की जिम्मेदारियां

सेबी अपनी जिम्मेदारियों से भाग नहीं सकता है – उसे याद रखना चाहिए कि वह केवल शेयरधारकों के लिए है और निहित स्वार्थों के लिए नहीं। उन मामलों की सूची, जिन पर सेबी ने कार्रवाई नहीं की है वह बहुत लंबी है- एनडीटीवी [5], टाटा संस [6] ध्यान में आते हैं। यह एकमात्र नियामक एजेंसी के प्रदर्शन का कोई तरीका नहीं है।

मुंबई के आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) की सिफारिशों, गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) के व्यापक जांच के निष्कर्षों के बाद, ने सेबी को आईआईएफएल जैसे दलालों को अयोग्य और अक्षम घोषित करने के लिए कहते हुए पत्र लिखा। सेबी आईआईएफएल मामले को तब तक के लिए रोक सकता था जब तक कि न्यायालय पीआईएल मामले पर फैसला नहीं कर देता। क्या जल्दी है? इसका कारण जानने के लिए रॉकेट वैज्ञानिक होने की आवश्यकता नहीं। संकेत: यह भारतीय जनता पर बरसनेवाला एक बड़ा वाकया है।

अंत में, जैसे सेबी ने आयसीआयसीआय म्यूचुअल फंड को आई-सेक आईपीओ में निवेश किए गए 240 करोड़ रुपये लौटाने का आदेश दिया था उसी प्रकार एसएफआईएल को आदेश देना चाहिए कि वे अब तक एकत्र किए गए धन को वापस लौटाए क्योंकि यह सौदा भी उतना ही बुरा है [7]

संदर्भ:

[1] EOW files second chargesheet in the NSEL case against 63 entitiesDec 28, 2018, Livemint.com

[2] IIFL taps Rs.2,000 crore NCD issue to diversify fund sourcesJan 22, 2019, Economic Times

[3] PIL against IIFL going ahead with public issueJan 25, 2019, Business Standard

[4] Brokers say NSEL scam a corporate fraudJan 16, 2014, Business Standard

[5] It is the system, stupid!Jan 8, 2018, PGurus.com

[6] Swamy slams SEBI Chairman for not acting on complaints of insider trading against Tata companiesOct 11, 2017, PGurus.com

[7] SEBI orders ICICI MF to return Rs.240 crores invested in I-SEC IPOJul 3, 2018, Economic Times

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