देश में पहला ‘जेनरिक दवाइयों का लंगर’

लंगर को लेकर तय किए गए मापदंडों के मुताबिक जहां चिकित्सक नि:शुल्क अपनी सेवाएं देंगे, वहीं गरीबों को दवाई निशुल्क मिलेगी।

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देश में पहला 'जेनरिक दवाइयों का लंगर'
देश में पहला 'जेनरिक दवाइयों का लंगर'

रायपुर में ‘दवाई का लंगर’

आमतौर पर ‘लंगर‘ का जिक्र आते ही धार्मिक स्थल खासकर गुरुद्वारा में मिलने वाले नि:शुल्क भोजन या प्रसाद का ख्याल आता है, मगर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में गरीबों को नि:शुल्क चिकित्सकीय सुविधा के साथ जेनरिक दवाएं उपलब्ध कराने के लिए ‘दवाई का लंगर‘ की शुरूआत हुई है। गरीबों को चिकित्सकीय परामर्श और दवाई सुविधा मुहैया कराने के लिए किए गए इस अभिनव नवाचार को आकार दिया है छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष और क्षेत्रीय विधायक कुलदीप जुनेजा ने। जुनेजा ने छत्तीसगढ़ सिख संगठन के सहयोग से देवेंद्र नगर चौराहे पर यह दवाई का लंगर शुरू किया है।

इस लंगर को लेकर तय किए गए मापदंडों के मुताबिक जहां चिकित्सक नि:शुल्क अपनी सेवाएं देंगे, वहीं गरीबों को दवाई निशुल्क मिलेगी। रविवार को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस ‘दवाई के लंगर’ की शुरूआत की है।

कुलदीप जुनेजा ने आईएएनएस को बताया है कि वे लंबे अरसे से राजधानी के सरकारी मेकाहारा अस्पताल में गरीबों को बेहतर चिकित्सा सुविधा और दवाइयां उपलब्ध कराने के प्रयास करते आ रहे हैं। यहां कई भवनों का निर्माण कराया है, एसी लगवाए हैं और अब वाटर कूलर लगाए जा रहे हैं। इसी दौरान उनके मन में एक विचार आया क्यों न एक ऐसा अस्पताल या दवाखाना शुरू किया जाए जहां गरीबों को चिकित्सकीय सुविधा और दवाइयां भी मुफ्त व आसानी से मिल सकें। इसी को ध्यान में रखकर ‘दवाई का लंगर’ शुरू किया गया है।

छत्तीसगढ़ में जुनेजा की पहचान स्कूटर वाले विधायक के तौर पर है। वे बताते हैं कि उन्होंने जब दवाई का लंगर की योजना बनाई तो कई चिकित्सक सहर्ष इस बात के लिए तैयार हो गए कि वे नि:शुल्क अपनी सेवाएं देंगे और पहले दिन से ही यहां चिकित्सकों के आने का सिलसिला हो शुरू हो गया है। वे मरीजों को नि:शुल्क परामर्श दे रहे हैं. यहां से मरीजों को निशुल्क जेनेरिक दवाइयां उपलब्ध कराई जा रही हैं।

जब इस तरह के काम शुरू होते हैं तो आम लोगों के सामने बजट का संकट आता है मगर जुनेजा कहते हैं कि उन्हें लोगों का इतना सहयोग मिलता है कि वे जिस काम को भी हाथ में लेते हैं उसे पूरा कराने में उन्हें दिक्कत नहीं जाती, क्योंकि लोगों का भरपूर सहयोग मिलता है। सहयोग करने की भी वजह होती है, क्योंकि उन्हें पता होता है कि मेरा लक्ष्य जनता और गरीबों की सेवा के साथ बेहतर सुविधाएं दिलाना ही होता है।

[आईएएनएस इनपुट के साथ]

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