सर्वोच्च न्यायालय का कथावाचक देवकीनंदन की याचिका पर फैसला, 9 राज्यों में हिंदुओं के लिए अल्पसंख्यक दर्जा मांगा था

याचिका में अल्पसंख्यक अधिनियम कानून को संविधान के अनुच्छेद 14,15,21,29 और 30 के विपरीत बताया गया है।

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सर्वोच्च न्यायालय का कथावाचक देवकीनंदन की याचिका पर फैसला, 9 राज्यों में हिंदुओं के लिए अल्पसंख्यक दर्जा मांगा था
सर्वोच्च न्यायालय का कथावाचक देवकीनंदन की याचिका पर फैसला, 9 राज्यों में हिंदुओं के लिए अल्पसंख्यक दर्जा मांगा था

क्या सर्वोच्च न्यायालय करेगा अल्पसंख्यक होते हिंदुओं के साथ न्याय?

सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को कहा कि अल्पसंख्यकों का दर्जा केवल राज्य स्तर पर ही मिलेगा। यह जिला स्तर पर नहीं होना चाहिए। कोर्ट ने यह बात हिंदुओं को कई राज्यों में अल्पसंख्यक का दर्जा देने की मांग वाली याचिका की सुनवाई के दौरान कही।

कथावाचक देवकीनंदन ने सर्वोच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की थी। इसमें कुछ राज्यों में हिंदुओं की संख्या कम होने पर उन्हें अल्पसंख्यक का दर्जा देने की मांग की गई थी।

सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि याचिका में मांग की गई है कि अल्पसंख्यकों का दर्जा जिला स्तर पर हो, लेकिन अगर ऐसा होता है तो यह कानून के विपरीत होगा। 11 जजों की बेंच का मानना है कि इसे राज्य स्तर पर ही किया जाना चाहिए।

पिछली सुनवाई में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि इस मामले में ठोस सबूत पेश किए जाएं, तभी हिंदुओं को अल्पसंख्यक दर्जा देने की मांग वाली याचिका पर विचार हो सकता है।

कथावाचक देवकीनंदन ने याचिका में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम 1992 की धारा- 2सी की वैधता को चुनौती दी है। याचिका में अल्पसंख्यक समुदाय को विशेष अधिकार देने और कई राज्यों-जिलों में हिंदुओं की कम आबादी के बावजूद उन्हें ऐसे अधिकारों से वंचित रखने को संविधान से उल्टा बताया गया है।

याचिका में अल्पसंख्यक अधिनियम कानून को संविधान के अनुच्छेद 14,15,21,29 और 30 के विपरीत बताया गया है।

देवकीनंदन ने याचिका में कई धर्मों के अनुयायियों की संख्या के आंकड़े पेश करते हुए चिंता जाहिर की है। याचिका में कहा गया है कि 9 राज्यों में हिंदू अल्पसंख्यक हो चुके हैं, मगर फिर भी वह अपनी पसंद के शैक्षणिक संस्थान नहीं खोल सकते, जबकि संविधान अल्पसंख्यक को यह अधिकार देता है।

याचिका में कहा गया है कि लद्दाख में सिर्फ 1%, मिजोरम में 2.75%, लक्षद्वीप में 2.77%, कश्मीर में 4% हिंदू हैं। इसके अलावा नगालैंड में 8.74%, मेघालय में 11.52%, अरुणाचल प्रदेश में 29%, पंजाब में 38.49% और मणिपुर में 41.29% हिंदू हैं। इसके बावजूद सरकार ने उन्हें अल्पसंख्यक घोषित नहीं किया है।

[आईएएनएस इनपुट के साथ]

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