अमेरिकी यूनिवर्सिटी में हिस्ट्री प्रोफेसर के द्वारा पैगंबर मोहम्मद की पेंटिंग दिखाए जाने पर भड़के मुस्लिम छात्र

    इस्लाम में पैगंबर मोहम्मद को चित्र वगैरह के माध्यम से दिखाने पर पाबंदी है। उनका चित्र या मूर्ति बनाना उनका अपमान समझा जाता है

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    अमेरिकी यूनिवर्सिटी में हिस्ट्री प्रोफेसर के द्वारा पैगंबर मोहम्मद की पेंटिंग दिखाए जाने पर भड़के मुस्लिम छात्र
    अमेरिकी यूनिवर्सिटी में हिस्ट्री प्रोफेसर के द्वारा पैगंबर मोहम्मद की पेंटिंग दिखाए जाने पर भड़के मुस्लिम छात्र

    पैगंबर मोहम्मद की तस्वीर दिखाने पर युनिवर्सिटी ने प्रोफेसर को नौकरी से निकाला, मुस्लिम स्पीकर बोले- ये हिटलर को अच्छा कहने के बराबर

    अमेरिका के एक छोटे से शहर सेंट पॉल की हेमलिन यूनिवर्सिटी इन दिनों काफी चर्चा में है। वहां आर्ट हिस्ट्री की एक प्रोफेसर को धार्मिक भावनाएं आहत करने के मामले में नौकरी से निकाल दिया गया। प्रोफेसर एरिका लोपेज प्रेटर पर आरोप है कि उन्होंने क्लास में पैगंबर मोहम्मद की 14वीं सदी में बनाई गई एक पेंटिंग दिखाई। जिससे यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले मुस्लिम छात्र नाराज हो गए।

    अमेरिका में एरिका को नौकरी से निकालने का मुद्दा बड़ा हो गया है। एक टाउनहॉल मीटिंग में एक मुस्लिम स्पीकर ने कहा कि पैगंबर की तस्वीर दिखाना हिटलर को अच्छा बताने के बराबर है। वहीं कई लोग प्रोफेसर लोपेज के समर्थन में आगे आ रहे हैं। इन लोगों को मानना है कि एक आर्ट हिस्ट्री की प्रोफेसर होने के नाते वो केवल अपना काम कर रहीं थी।

    मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक प्रोफेसर एरिका लोपेज ने तस्वीर दिखाने से पहले कहा था कि अगर किसी को इससे तकलीफ है तो वो पहले ही बाहर जा सकते हैं। फिर भी हैमलिन यूनिवर्सिटी में कई छात्र उनकी क्लास में बैठे रहे। तस्वीर देखी और फिर उनकी शिकायत कर दी।

    एरिका ने बताया कि इस पूरी घटना से पहले वो जानती थीं कि पेंटिंग दिखाने से मुस्लिम समुदाय की भावनाएं आहत हो सकती हैं। इसलिए उन्होंने पहले ही क्लास में बताया था कि आर्ट हिस्ट्री के कोर्स में गौतम बुद्ध और प्रोफेट मोहम्मद की कुछ तस्वीरें दिखाई जाएंगी।

    जब उन्होंने यह बताया तब भी किसी छात्र ने कोई आपत्ति जाहिर नहीं की थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रोफेसर की शिकायत करने वालों में केवल एक छात्र ही उनके आर्ट हिस्ट्री कोर्स का था। बाकी सब दूसरे विषयों के थे।

    पूरे मामले पर हैमलिन यूनिवर्सिटी के ऑफिशियल्स ने सभी छात्रों और उन्हें पढ़ाने वाले टीचर्स को एक मेल भेजा है। जिसमें कहा गया कि प्रोफेसर लोपेज प्रेटर का पैगंबर की तस्वीर दिखाना इस्लामोफोबिया यानी इस्लाम के प्रति नफरत का एक मामला है।

    यूनिवर्सिटी के प्रेसिडेंट ने कहा कि अपनी अकादमिक आजादी से बढ़कर छात्रों की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए था। हैमलिन एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी है जिसमें करीब 1800 छात्र पढ़ते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस मुद्दे को दबाने के लिए यूनिवर्सिटी ने पूरी कोशिश की थी। हालांकि ऐसा नहीं हो पाया

    अब देशभर के अकादमिक लेखक इस पर बहस करने लगे हैं। एरम वेदातला वो स्टूडेंट हैं जिन्होंने प्रोफेसर की शिकायत की थी। अपने एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा- पैगंबर की तस्वीर देखने से मुझे अंधा महसूस हुआ। मैंने सोचा ऐसा नहीं हो सकता है। ये हकीकत नहीं है।

    बता दें कि इस्लाम के मुताबिक पै​​​​​​गंबर मोहम्मद को चित्र वगैरह के माध्यम से दिखाने पर पाबंदी है। उनका चित्र या मूर्ति बनाना उनका अपमान समझा जाता है। जानकारों के मुताबिक कुरान के 42वीं सूरे की 42 नंबर आयत में कहा गया है, “अल्लाह ही धरती और स्वर्ग को पैदा करने वाला है। उसकी तस्वीर जैसी कोई चीज नहीं है।”

    [आईएएनएस इनपुट के साथ]

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