कुवैत में काम कर रहे भारतीय कामगारों की संख्या में बड़ी गिरावट

    जिन लोगों को कुवैत छोड़ना पड़ा है, उनमें प्राइवेट और सरकारी क्षेत्र में 60,400 घरेलू वर्कर और 107,900 प्रवासी कामगार शामिल हैं। इससे कुवैत में कुल घरेलू कामगारों की संख्‍या में 9 फीसदी की गिरावट आई है।

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    कुवैत में काम कर रहे भारतीय कामगारों की संख्या में बड़ी गिरावट
    कुवैत में काम कर रहे भारतीय कामगारों की संख्या में बड़ी गिरावट

    कुवैत छोड़ने वाले कामगारों में भारतीय सबसे अधिक

    कोरोना की मार के बीच खाड़ी देश कतर से भारतीय कामगारों के लिए बुरी खबर है। साल 2021 के पहले 9 महीने में 1,68,000 प्रवासी कामगारों को कुवैत छोड़ना पड़ा है। दुखद बात यह है कि इसमें सबसे ज्‍यादा भारतीय हैं। जिन लोगों को कुवैत छोड़ना पड़ा है, उनमें प्राइवेट और सरकारी क्षेत्र में 60,400 घरेलू वर्कर और 107,900 प्रवासी कामगार शामिल हैं। इससे कुवैत में कुल घरेलू कामगारों की संख्‍या में 9 फीसदी की गिरावट आई है।

    अल अन्‍बा अखबार के मुताबिक कुवैत के कुल घरेलू वर्कर्स की संख्‍या में 9 फीसदी की गिरावट आई है। ऐसा इसलिए हुआ क्‍योंकि 60,400 कामगार लेबर मार्केट से चले गए हैं। इससे सितंबर 2021 में कुल कामगारों की संख्‍या गिरकर 6,08,230 पहुंच गई। साल 2021 की शुरुआत में कुल कामगारों की संख्‍या कुवैत में 668,615 थी। जिन कामगारों को कुवैत छोड़ना पड़ा है, उनमें सबसे ज्‍यादा 48 हजार भारतीय हैं।

    इसके साथ ही अब यहाँ काम करने वाले कुल भारतीयों की संख्‍या अब 499,400 से घटकर 451,380 पहुंच गई है। अगर इसे प्रतिशत में देखें तो यहाँ काम करने वाले भारतीयों की संख्‍या में 10 फीसदी की कमी आई है। वहीं कुवैत में काम करने वाले मिस्र के मजदूरों की संख्‍या में करीब 5 फीसदी की गिरावट आई है। इसके बाद तीसरे नंबर पर बांग्‍लादेश के कामगारों का नंबर है। साल 2021 में नेपाल के कामगारों को भी झटका लगा और उनकी संख्‍या भी 7 हजार घटी है।

    इसके अलावा फिलीपीन्‍स और पाकिस्‍तान के मजदूरों की संख्‍या में कमी आई है। एक तरफ विदेशी कामगार जहां यहाँ से जा रहे हैं, वहीं देश के नागरिकों की नौकरी में बढ़ोत्‍तरी हुई है। देश के 17,511 लोगों को नौकरी मिली है। दरअसल, कुवैत नौकरियों में विदेशी नागरिकों की जगह पर अपने नागरिकों को तरजीह दे रहा है और उसकी यह योजना इस साल अगस्‍त तक पूरी हो जाएगी। देश की कुल आबादी में 75 फीसदी प्रवासी हैं जिसमें सबसे ज्‍यादा भारतीय हैं। इससे भारत को बड़े पैमाने पर विदेशी मुद्रा मिलती है। कुवैत के इस कदम से भारतीयों को बड़ा झटका लगा है।

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