भीतर का दुश्मन – एक मोदी की दूसरे मोदी के खिलाफ छिपी हुई गुप्त कार्यावली

आईआरएस में बरखास्तगी के बारे में जितनी अधिक जाँच-पड़ताल होती है, उतनी अधिक गंदगी उभर कर सामने आती है - एनडीटीवी को बचाने और एक ईमानदार आईआरएस अधिकारी को बर्खास्त करने की साजिश।

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भीतर का दुश्मन - एक मोदी की दूसरे मोदी के खिलाफ छिपी हुई गुप्त कार्यावली
भीतर का दुश्मन - एक मोदी की दूसरे मोदी के खिलाफ छिपी हुई गुप्त कार्यावली

पिछले 10 दिनों में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने दो हिस्सों में 12 और 15, कुल मिलाकर 27 भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) अधिकारियों को अनिवार्य रूप से नियम 56 (जे) के तहत, मौलिक नियम जो सरकार को यह अधिकार देती है कि वह अपने किसी भी कर्मचारी को सेवानिवृत्त कर सके जो 35 वर्ष से कम उम्र में सरकारी नौकरी में शामिल हुआ और 50 वर्ष की आयु प्राप्त कर ली है या 35 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद नौकरी प्राप्त कर 20 वर्ष की सेवा पूरी कर ली है, सेवानिवृत्त किया गया हैं।

अनिवार्य सेवानिवृत्ति कानून द्वारा प्रकृतिक तौर पर दंडनीय नहीं माना जाता और इसलिए कारण बताओ नोटिस या सुनवाई की अवसर जारी करने की आवश्यकता नहीं है।

27 आईआरएस अधिकारियों में से 26 पर भ्रष्ट होने का आरोप है, जबकि एक एस के श्रीवास्तव पर दो महिला आईआरएस अधिकारियों को “वेश्या” कहने और वेश्यावृत्ति से कमाई गई उनकी आय पर कर लगाने का आग्रह करने का आरोप है।

मुख्य मुद्दा क्या है और इस के बड़े प्रभाव क्या हैं?

भ्रष्टाचार का नियंत्रण जो सार्वजनिक जीवन में फैल गया है, विशेष रूप से भारत के नौकरशाही में कदाचित भारतीय राजनीति के समक्ष सबसे महत्वपूर्ण कारकों में से एक है और यह रिकॉर्ड का विषय है कि पीगुरुस ने हमेशा, भ्रष्टाचार के खतरे को कम करने, रोकने या हो सके तो उसे पूर्णतः मिटाने के सरकार के संकल्प में सरकार का समर्थन किया है।

भारत – 2019

2019 का भारत इस मायने में अद्वितीय है कि इसमें प्रधान मंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की संभवत: सबसे अच्छी टीम है जो प्रधानमंत्री नेहरू और गृह मंत्री सरदार पटेल की टीम से भी बेहतर है। सरदार पटेल के विपरीत उम्र अमित शाह के पक्ष में है – प्रधानमंत्री मोदी मार्क्सवाद की पुरानी विचारधारा की विफलताओं और प्रधानमंत्री नेहरू के दृष्टिकोण को प्रभावित करने वाले व्यक्तिगत चरित्र से पीड़ित नहीं हैं। मेरी विनम्र राय में, टीम मोदी-शाह भारत को आगे ले जाने के लिए बेहतर स्तिथि में है लेकिन …

सार्वजनिक जीवन में भ्रष्टाचार का नियंत्रण एक ऐसा लक्ष्य है जिसे टीम मोदी-शाह अपने लिए निर्धारित करना चाहते हैं और बाहरी तौर पर ऐसा लगता है कि टीम मोदी-शाह के एजेंडे पर राजस्व विभाग द्वारा कार्रवाई की गई है लेकिन क्या वास्तव में ऐसा है?

क्या भ्रष्टाचार केवल राजस्व विभाग तक ही सीमित है और अन्य सेवाओं, विशेष रूप से कुलीन, उच्च जाति के भारतीय प्रशासनिक सेवा [आईएएस] में कोई भ्रष्ट अधिकारी नहीं है और सरकार द्वारा राजस्व विभाग में पिछले 10 दिनों में किए गए सर्जिकल ऑपरेशन की तरह इस विभाग में भी कार्यवाही करने की जरूरत नहीं है ? जवाब जानने के लिए आगे पढ़िए

क्या आईएएस चालित पूर्णतः शुद्ध है?

यदि स्वतंत्र भारत में घोटाले में शामिल लोगों की एक सूची, जीप घोटाले से लेकर, मुंद्रा घोटाला, बोफोर्स सौदा, 2 जी घोटाला, कोयला घोटाला, आईएनएक्स मीडिया घोटाला, एयरसेल मैक्सिस घोटाला इत्यादि, बनाई गई तो इसमें शामिल कितने लोग राजस्व विभाग से होंगे और कितने आईएएस से?

इसका उत्तर इस मुद्दे को सुलझाता है कि प्रमुख भ्रष्टाचार राजस्व विभाग में नहीं है, लेकिन उन विभागों में जहां सार्वजनिक धन खर्च किया जाता है और जो विशिष्ट रूप से कुलीन आईएएस द्वारा नियंत्रित किया जाता है और जो कि सेवारत और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारियों पर संबंधित एजेंसियों द्वारा शुरू किए गए अभियोगों से स्पष्ट है ।

यह देखना दिलचस्प होगा कि राजस्व विभाग के भ्रष्टाचार का कारोबार क्या है और आईएएस अधिकारियों द्वारा नियंत्रित विभागों का भ्रष्टाचार कितना है।

ऐसा लगता है जैसे कोई विश्वसनीय डेटा नहीं है। लेकिन एक विश्वसनीय संकेतक उनकी सेवानिवृत्ति के बाद का जीवन और जीवन स्तर होगा।

सेवानिवृत्ति के बाद कितने भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारी फार्महाउस में रहते हैं और सेवानिवृत्ति के बाद कितने आईएएस अधिकारी देश भर में स्थित फार्महाउस में रहते हैं? इसी तरह, कितने आईआरएस अधिकारियों के पास स्विस बैंक खातों की संख्या क्रम है या जिन्होंने कर मुक्त देशों में पैसा जमा किया है और कितने आईएएस अधिकारियों को इसका फायदा हुआ है?

उपरोक्त प्रश्नों के जवाब सरकार की विभिन्न सेवाओं में भ्रष्टाचार का एक उचित और विश्वसनीय मापदण्ड देगा।

अंतर-सेवा के बीच भ्रष्टाचार का फैलाव भ्रष्टाचार के राक्षसी बहु-प्रमुख जलव्याल से निपटने के दौरान एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, अंतर-सेवा धाराएं और अशांति भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।

भ्रष्ट महिला आईआरएस अधिकारियों का क्या?

एक महिला आईआरएस अधिकारी को वेश्या कहना और मांग करना कि वेश्यावृत्ति से उसकी आय पर कर लगाया जाए, अशिष्ट लग सकती है – मामले के तथ्यों के आधार पर गैरकानूनी हो ये जरूरी नहीं, लेकिन यह निश्चित रूप से भ्रष्टाचार नहीं होगा और अपनी महिला सहयोगियों को वेश्या कहनेवाला और फिर यह मांग करनेवाला की कि वे वेश्यावृत्ति से कमाई गई अपनी आय पर कर का भुगतान करे, का आरोपी, जैसा कि इस मामले में आरोप लगाया गया है, जिस प्रकार भ्रष्टाचार और भ्रष्ट इन दो चीजों को समाज में समझा जाता है, निश्चित रूप उसके आधार पर यह अधिकारी भ्रष्ट नहीं कहा जा सकता। हमें यह समझना चाहिए कि एस के श्रीवास्तव के खिलाफ ये सारे आरोप यकीनन सबसे भ्रष्ट वित्त मंत्रियों में से एक श्री पी चिदंबरम द्वारा लगाए गए थे, क्योंकि स्वतंत्र विचारों वाले अधिकारी ने एनडीटीवी में बड़े पैमाने पर कर चोरी और काला धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) पाया था। हमने एक विस्तृत लेख प्रकाशित किया है जिसमें ये बताया है कि ईमानदार अधिकारी श्रीवास्तव के निष्कासन के लिए कौन जिम्मेदार थे [1]

सीबीडीटी – केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड

इसके अलावा, सीबीडीटी की आंतरिक गतिशीलता, वर्तमान उदाहरण में अग्रणी एजेंसी पर पर्यवेक्षण करना जरूरी है।

प्रमोद चन्द्र मोदी (पीसी मोदी), अध्यक्ष, सीबीडीटी खुद भ्रष्ट होने के आरोपी थे और उन पर उनके द्वारा किए गए सर्वेक्षणों में  भारी मात्रा में रिश्वत लेने या उनके इशारे पर रिश्वत लेने, अधिनियम 1961 की धारा 133 ए के तहत आरोप लगाए गए थे जब वे गुजरात में तैनात थे और सीबीडीटी में उनका उत्थान काफी देरी से हुआ, लेकिन अंततः केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) और उसके प्रमुख केवी चौधरी (केवीसी) ने उन्हें निर्दोष करार दिया और वे सीबीडीटी के सदस्य बन गए और फिर केवीसी और सीवीसी द्वारा दिए गए प्रमाण पत्र के आधार पर, वह एक पूरे बैच से उनके वरिष्ठ आदित्य विक्रम को पीछे छोड़ते हुए सीबीडीटी के अध्यक्ष बन गए।यह संभव है कि पी सी मोदी (पीसीएम) भ्रष्ट नहीं है और उस पर गलत तरीके से भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया था और वह सीवीसी और केवीसी द्वारा पूछताछ में साफ (या साफ निकला?) पाया गया। लेकिन अगर ऐसा है, तो उसी शिष्टाचार को दूसरों पर भी लगाया जाना चाहिए।

पी के गुप्ता का मामला

एक अन्य उदाहरण प्रमोद कुमार गुप्ता (पीकेजी) का है, जो कानपुर और दिल्ली में प्रधान आयकर आयुक्त हैं, जिन्हें पीसी मोदी का पसंदीदा माना जाता है, लेकिन जिन पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने दो बार भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।

पीकेजी पर धनबाद में तैनात रहने के दौरान सीबीआई ने कोयला माफिया रमेश गांधी के रिकॉर्ड को अपने कार्यालय में आग लगने का नकली दावा करके नष्ट करने के आरोपों में छापा मारा था, जब वास्तव में सीबीआई ने पाया कि स्टील आलमीरा, जिसमें कथित तौर पर रिकॉर्ड जल गए थे, उन्हें गैस कटर से काटा गया है! इसके तुरंत बाद पी के गुप्ता एक महीने की छुट्टी के लिए यूएसए रवाना हो गए, जिसमें उन्होंने दावा किया कि उन्हें उनकी बहन का समर्थन मिल रहा है, लेकिन ध्यानाकर्षी शब्द यह थी कि उक्त बहन केवल एक रिसर्च स्कॉलर थी, जिसे केवल प्रति माह 1250 अमेरिकी डॉलर का वजीफा मिलता था!

निष्पक्ष तौर पर, न्यायालय ने सीबीआई द्वारा उसके खिलाफ फिर से जांच का आदेश देने के बावजूद, पीकेजी को सारे आरोपों से बरी कर दिया गया। एक बार फिर, पीके गुप्ता, दिल्ली की सीमा पर एक शानदार बंगले का निर्माण करते हुए, सीबीआई द्वारा भ्रष्ट होने के आरोपों पर छापा मारा गया था, क्योंकि ये पाया गया कि उसने एक संपत्ति विक्रेता को 300,00,000/- (3 करोड़) रुपये का भुगतान किया ताकि विक्रेता उसके लिए उसकी पसंद के एक भूखंड की व्यवस्था करे लेकिन फिर निष्पक्ष तौर पर यह बताना अवश्यक है कि वह मुकदमे में अदालत द्वारा बरी हो गया।

पी सी मोदी ने पी के गुप्ता को निष्कलंक घोषित किया!

सीबीडीटी के अध्यक्ष पीसी मोदी ने न केवल पीके गुप्ता के बारे में कुछ भी गलत नहीं पाया बल्कि कानपुर और दिल्ली में दो प्रभार के साथ उनका समर्थन भी किया है, जो सीबीडीटी के सूत्रों के अनुसार, आमतौर पर प्रशासनिक कठिनाईयों के कारण नहीं किया जाता है जो सबसे वरिष्ठ अधिकारियों की कार्यालय से अनुपस्थिति के कारण होता है। लेकिन पी सी मोदी, जिसका कारण केवल वे ही जानते है, ने न केवल पी के गुप्ता के नाम को अनिवार्य सेवानिवृत्त लोगों की सूची से बाहर रखा, बल्कि अनसुनी रियायतों से उन्हें पुरस्कृत भी किया!

जिस प्रश्न का उत्तर देने की आवश्यकता है, वह यह है कि सीबीडीटी के अध्यक्ष पी सी मोदी दूसरों को वही उदारता क्यों नहीं प्रदान कर रहे हैं जो उन्हें स्वयं मिला और जो उन्होंने अपने पसंदीदा पी के गुप्ता को दिलवाया, न्यायालयों द्वारा स्वयं को निष्कलंक घोषित कराने का मौका।

इसी तरह, पीसीएम ने, जो अपनी दो महिला आईआरएस अधिकारियों के वेश्या काहे जाने पर भौचक्का हो गए, उन दो भ्रष्ट आईआरएस अधिकारियों के रिश्वत लेने के कारण किए गए आपराधिक अभियोजन को अवरुद्ध कर दिया है, जिसका कारण वे ही जानते हैं [2]। उन्होंने करदाताओं के पैसे की कीमत पर भ्रष्टाचार के मामलों से लड़ने के लिए उन महिला आईआरएस अधिकारियों को वकील [मैसर्स डीएसके लीगल एंड उसके पार्टनर रवि प्रकाश, एडवोकेट] भी प्रदान किए थे।

मुआवजा का खेल?

सीबीडीटी के सूत्रों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि एसके श्रीवास्तव, जिन पर उन दो महिला आईआरएस अधिकारियों को वेश्या कहने का आरोप है और जिन्हें न्यायालयों में भी नकारा नहीं गया क्योंकि उन दो महिला आईआरएस अधिकारियों ने एसके श्रीवास्तव पर फर्जी यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज करने के लिए एनडीटीवी लिमिटेड से पैसे लिए थे; पी सी मोदी के साथ उन दो महिला आईआरएस अधिकारियों के भ्रष्टाचार के मामलों को छुपाने के उनके प्रयासों पर भारी लड़ाई हुई। क्यों? क्योंकि उस पर जांच एनडीटीवी लिमिटेड और उसके धन शोधन के आरोपों में प्रणॉय जेम्स रॉय और राधिका रॉय, जो रिश्वत देने वाले थे, दोषी ठहराता। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि अल्पतम प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह के मंत्रिमंडल में वित्त मंत्री और गृह मंत्री के रूप में रंगीन पी चिदंबरम सामने आएंगे। चिदम्बरम के एक ज्ञात आदमी, के वी चौधरी, के परोपकार से प्राप्त सीबीडीटी के पद के लिए बाध्य होने के बाद पी सी मोदी (स्वयं एक पीसी के आदमी) पूर्व वित्त मंत्री चिदंबरम को बचाना और उसके अपराधों को ढंकना चाहते थे।

यह एक रिकॉर्ड की बात है कि सुमना सेन ने अपने पति अभिसार शर्मा को एनडीटीवी लिमिटेड द्वारा कार्यरत करवाया, जबकि वह एनडीटीवी लिमिटेड के कर मामलों से निपट रही थी। प्रणय जेम्स रॉय और राधिका रॉय ने सेन और उनके पति को सभी खर्चों का भुगतान करके विदेश में छुट्टियां मनाने भेजा। रॉय दम्पति ने अपने कर अपराधों को छुपाने के लिए नोयडा में लगभग 5 करोड़ रुपये का एक लक्जरी बंगला भी प्रदान किया [3]

इसी तरह, यह रिकॉर्ड की बात है कि आशिमा नेब ने एनडीटीवी लिमिटेड के मॉरीशस व्यवसाय का निरीक्षण करते हुए अपने साथी के साथ मॉरीशस की यात्रा की थी और लगभग 10 दिनों तक एक 7-स्टार लक्ज़री रिसॉर्ट में रुके थे, जहां रातो का किराया 1,100  यूरोस से अधिक था, साथ ही संपन्न वेस्ट दिल्ली में एक हाउसिंग सोसाइटी की सदस्यता तोहफे के रूप में दी गई, जिसकी लागत 2008 में लगभग 1 करोड़ रुपये थी और जो अब  लगभग 5 करोड़ रुपये तक बढ़ चुकी है।

इस खबर को अंग्रेजी में यहाँ पढ़े।

यह भी एक रिकॉर्ड की बात है कि जब एसके श्रीवास्तव ने एनडीटीवी लिमिटेड और प्रणय जेम्स रॉय के खिलाफ रिश्वत देने के लिए कार्यवाही करने के लिए कहा, तो सुमना सेन और आशिमा नेब ने एसके श्रीवास्तव के खिलाफ यौन उत्पीड़न का नकली मुकदमा दायर किया उनका पार्टनर-इन-क्राइम (और कौन?) पी चिदंबरम द्वारा निलंबित कराया।

इसलिए, इस पर विचार किया जाना चाहिए कि क्या सीबीडीटी और उसके वर्तमान अध्यक्ष प्रधान मंत्री मोदी के एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं या उसकी आड़ में उन लोगों के साथ व्यक्तिगत बदला ले रहे हैं, जो उनके द्वारा दो महिलाओं, आईआरएस अधिकारी, सेन और नेब, के भ्रष्ट और भ्रष्टाचार को दिए गए संरक्षण के विरोध में हैं।

पीएम मोदी को तेजी से कार्यवाही करने की जरूरत है

टीम पीगुरुस दृढ़ता से अनुशंसा करता है कि प्रधान मंत्री, जिनको बहुत बड़ा जनादेश मिला है, एक स्वतंत्र, निष्पक्ष समिति का गठन करें जो एक सेवानिवृत्त सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता में संदिग्ध और आरोपी अधिकारियों के सेवा रिकॉर्ड का मूल्यांकन करे, भ्रष्टाचार के आरोपों को प्रमाणित करे और भ्रष्ट सत्यापित हो और उसके बाद नौकरशाही के उन सभी अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही करें और केवल भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) के खिलाफ नहीं। बुरे और भ्रष्ट लोग हर जगह होते हैं।

संदर्भ:

[1] Who are behind the termination of IT Commissioner S K Srivastava who exposed NDTV and Chidambaram frauds? Jun 12, 2019, PGurus.com

[2] For saving Chidambaram & Prannoy Roy, Revenue Department & CBDT closing the case against NDTV bribe taking lady IRS Officers? Jan 19, 2019, PGurus.com

[3] NDTV Frauds V2.0 – The Real Culprit – Amazon.in

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