पीएमओ का सभी मंत्रालयों को सख्त निर्देश, कानून बनाते समय विदेशी कानूनों और चलन पर भी हो विचार

पीएमओ का आदेश - जो भी नोट्स अंतर मंत्रालयी परामर्श के लिए भेजे जाएं उसकी प्रति पीएमओ और सचिवालय में जरूर भेजी जाए

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पीएमओ का सभी मंत्रालयों को सख्त निर्देश, कानून बनाते समय विदेशी कानूनों और चलन पर भी हो विचार
पीएमओ का सभी मंत्रालयों को सख्त निर्देश, कानून बनाते समय विदेशी कानूनों और चलन पर भी हो विचार

पीएमओ का आदेश – जो भी नोट्स अंतर मंत्रालयी परामर्श के लिए भेजे जाएं उसकी प्रति पीएमओ और सचिवालय में जरूर भेजी जाए

केंद्र सरकार ने कानून बनाने के संबंध में अपने सभी मंत्रालयों को अहम निर्देश दिया है। इसके तहत किसी भी विषय पर कानून बनाते समय कैबिनेट नोट में वैश्विक कार्यप्रणाली-कानूनों पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है। इसके साथ ही नोट्स की प्रति को प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) और कैबिनेट सचिवालय को भी भेजने का निर्देश जारी किया गया है। मीडिया रिपोर्ट में उपलब्ध इस सर्कुलर में कहा गया है कि जब भी कोई मंत्रालय कानून का मसौदा तैयार करे तो कैबिनेट के सामने भेजने से पहले इसके सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार करें।

सर्कुलर में कहा गया है कि सभी कैबिनेट नोट्स में इस बात पर विचार किया जाना चाहिए कि उस विषय से संबंधित ग्लोबल प्रैक्टिस और विदेश में चल रहे कानून क्या हैं। इसके साथ ही देश की वर्तमान स्थिति और भविष्य के रोड मैप को ध्यान में रखकर सभी नोट्स बनाए जाने चाहिए। पीएमओ ने यह भी कहा है कि जो भी नोट्स अंतर मंत्रालयी परामर्श के लिए भेजा जाए उसकी प्रति पीएमओ और सचिवालय में जरूर भेजी जाए।

एक अगस्त को कैबिनेट सचिवालय ने सभी मंत्रालयों को भेजे इस पत्र में कहा है- ‘यह देखा गया है कि जब नोट अंतर-मंत्रालयी परामर्श के लिए भेजे जाते हैं, तो कुछ मंत्रालय/विभाग ड्राफ्ट (कैबिनेट) नोट की प्रति पीएमओ और कैबिनेट सचिवालय में नहीं भेज रहे हैं।’ पीएमओ ने कहा है कि 2015 में जो प्रक्रिया अपनाई गई थी, उसका अनुपालन नहीं किया जा रहा है। पीएमओ ने सख्त निर्देश देते हुए कहा है कि नोट को कैबिनेट में विचार के लिए रखे जाने से पहले उसकी सभी स्तरों पर सावधानीपूर्वक जांच करना आवश्यक है। इस निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने से प्रस्ताव में विसंगतियों को दूर किया जा सकता है।

कैबिनेट नोटों का मसौदा तैयार करते समय विषय से संबंधित सभी मामलों की समग्र रूप से जांच की जानी चाहिए। इसमें विषय से संबंधित ग्लोबल प्रैक्टिस और विभिन्न देशों में प्रख्यापित कानूनों पर विचार किया जाना चाहिए जो हमारे लिए प्रासंगिक हो।

कानून का मसौदा इस तरह से तैयार हो कि उसमें बार-बार संशोधन की जरूरत न पड़े। इसके लिए सभी पहलुओं पर समग्रता से विचार हो।

नोट में सभी प्रासंगिक इनपुट पैराग्राफ में दिया जाना चाहिए जिसका संबंधित विषयों के साथ तालमेल हो। इसके साथ ही विवरण को नोट के अनुलग्नक में शामिल किया जा सकता है।

विषय से संबंधित सर्वोत्तम प्रैक्टिस पर विचार हो। विषय के औचित्य को ध्यान में रखते हुए नोट्स में देश की वर्तमान स्थिति और भविष्य के रोड मैप की स्पष्ट तस्वीर होनी चाहिए। इसके साथ ही राज्यों के कानूनों पर भी गौर करना जरूरी है।

कैबिनेट में मसौदा भेजे जाने से पहले या अंतर मंत्रालयी परामर्श से संबंधित नोटों को पीएमओ और केंद्रीय सचिवालय में भेजा जाना अनिवार्य है

[आईएएनएस इनपुट के साथ]

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