महाराष्ट्र कर्नाटक सीमा विवाद : 865 विवादित गांवों की जमीन महाराष्ट्र में मिलाएंगे सीएम शिंदे, विधानसभा में पास हुआ प्रस्ताव!

    आजादी के बाद से ही महाराष्ट्र बेलगाम, खानापुर, निप्पणी, नंदगाव और कारावार सहित 814 गांवों पर अपना दावा करता आया है।

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    महाराष्ट्र कर्नाटक सीमा विवाद
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    महाराष्ट्र विधानसभा में कर्नाटक से सटी विवादित जमीन को महाराष्ट्र में मिलाने का प्रस्ताव पारित

    कर्नाटक-महाराष्ट्र जमीन विवाद को लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बड़ा कदम उठाया है। महाराष्ट्र विधानसभा में दोनों राज्यों के बीच की विवादित जमीन को महाराष्ट्र में मिलाने का प्रस्ताव पारित किया गया है। इसमें 865 गांव आते हैं। महाराष्ट्र विधानसभा में यह प्रस्ताव बिना विरोध पारित हो गया।

    महाराष्ट्र ने अपने प्रस्ताव में कहा है कि विवादित इलाके में 865 मराठीभाषी गांव हैं और इनकी एक-एक इंच जमीन महाराष्ट्र में मिला दी जाएगी। ऐसा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में जो भी करने की जरूरत होगी वो महाराष्ट्र सरकार करेगी। इस गांवों में बेलगाम, कारावार, बिदार, निप्पणी, भल्की शामिल हैं।

    गुरुवार को ऐसा ही एक प्रस्ताव कन्नड़ विधानसभा ने भी पारित किया था। इसमें वहां की सरकार ने विवादित जमीन को महाराष्ट्र को न देने की बात कही थी। आज विधानसभा सत्र में महाराष्ट्र सीएम एकनाथ शिंदे ने कर्नाटक के इस प्रस्ताव को मराठा-विरोधी बताया और यह प्रस्ताव पारित किया।

    कर्नाटक ने इस सीमा विवाद की निंदा करते हुए महाराष्ट्र को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया था। कर्नाटक के प्रस्ताव में कहा गया था कि कर्नाटक की जमीन, पानी, भाषा और कन्नड़ हितों से जुड़े किसी भी मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। कर्नाटक के लोगों और विधानसभा सदस्यों की भावनाएं ऐसा ही एक मुद्दा हैं और अगर इनपर असर पड़ा तो हम राज्य के हितों की रक्षा के लिए संवैधानिक और कानूनी तौर पर कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध रहेंगे।

    आजादी के बाद से ही महाराष्ट्र बेलगाम, खानापुर, निप्पणी, नंदगाव और कारावार सहित 814 गांवों पर अपना दावा करता आया है। महाराष्ट्र के कई नेताओं का कहना है कि यहां के लोग मराठी भाषी हैं। जब भाषा के आधार पर पुनर्गठन हुआ था तो इन गावों को कर्नाटक की बजाय महाराष्ट्र में शामिल किया जाना चाहिए था। दूसरी ओर, कर्नाटक का कहना है कि राज्य की सीमाएं पुनर्गठन कानून के तहत तय हुई थीं। फिर विवाद की गुंजाइश नहीं है।

    [आईएएनएस इनपुट के साथ]

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